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12 Jan 2026, Mon

ग्रेच्युटी पर सरकार का बड़ा फैसला, इनको मिलेगा डबल फायदा

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा की गारंटी है। लेकिन क्या हो अगर आपने जीवन में दो अलग-अलग सरकारी संस्थाओं में काम किया हो? क्या आपको दो बार ग्रेच्युटी मिलेगी या सरकार दूसरे कार्यकाल के पैसे काट लेगी? इसी उलझन को सुलझाते हुए केंद्र सरकार के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने एक बेहद अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के लिए जारी किए गए इस नए आदेश में साफ किया गया है कि कब आपकी ग्रेच्युटी पर ‘लिमिट’ लगेगी और कब आपको पूरा फायदा मिलेगा।
सरकार ने मेमोरेंडम में ‘CCS Amendment Rules, 2025’ के नियम 4A को आधार बनाया है। आसान भाषा में समझें तो यह नियम ‘डबल बेनिफिट’ को रोकता है। विभाग ने साफ किया है कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी रिटायर होता है और उसे उसकी ग्रेच्युटी मिल चुकी है, तो दोबारा सरकारी नौकरी ज्वाइन करने पर उसे उस दूसरे कार्यकाल के लिए अलग से ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी। यानी, एक बार सरकारी खजाने से रिटायरमेंट ग्रेच्युटी लेने के बाद, उसी सिस्टम में री-एम्प्लॉयमेंट पर दोबारा ग्रेच्युटी का दावा नहीं किया जा सकता।

इस आदेश में उन कर्मचारियों के लिए नियम थोड़े अलग हैं जो किसी पीएसयू (PSU) या स्वायत्त निकाय से विधिवत अनुमति लेकर केंद्र सरकार की सेवा में आए हैं। ऐसे कर्मचारियों के लिए खबर थोड़ी राहत भरी है, लेकिन एक शर्त के साथ। अगर आप PSU से आए हैं, तो आपको वहां की ग्रेच्युटी रखने का हक है और केंद्र सरकार की सेवा के लिए भी ग्रेच्युटी मिलेगी। लेकिन, यहां सरकार ने एक ‘सीलिंग’ लगा दी है। नियम के मुताबिक, दोनों जगहों से मिली कुल ग्रेच्युटी की रकम उस राशि से ज्यादा नहीं हो सकती, जो कर्मचारी को तब मिलती अगर उसने अपनी पूरी सेवा (PSU + केंद्र सरकार) लगातार केंद्र सरकार में ही की होती। यही फार्मूला उन लोगों पर भी लागू होगा जो राज्य सरकार की नौकरी छोड़कर केंद्र में आए हैं। कुल मिलाकर, दो जेबों से पैसा तो आएगा, लेकिन उसकी कुल सीमा आपकी फाइनल सैलरी और कुल सेवा अवधि के आधार पर तय होगी। इस पूरे मामले में सबसे बड़ी राहत हमारे पूर्व सैनिकों के लिए है। सरकार के पास कई सवाल आ रहे थे कि मिलिट्री सर्विस के बाद सिविल सर्विस ज्वाइन करने वालों का क्या होगा?
व्यय विभाग से सलाह के बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पूर्व सैनिकों पर ‘ग्रेच्युटी लिमिट’ का यह नियम लागू नहीं होगा।

इसका मतलब है कि अगर किसी ने सेना में सेवा दी है और वहां से ग्रेच्युटी ले ली है, तो बाद में सिविल सेवा ज्वाइन करने पर उसे सिविल सर्विस की ग्रेच्युटी पूरी मिलेगी। मिलिट्री से मिली ग्रेच्युटी के कारण उनकी सिविल सर्विस की ग्रेच्युटी में एक रुपये की भी कटौती नहीं की जाएगी।

By Aryavartkranti Bureau

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