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26 Feb 2026, Thu

संसद में हंगामा: राहुल का नाम लिए बिना खरगे से बोले जेपी नड्डा- पार्टी को अबोध बालक का बंधन न बनने दें

नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में सियासी हंगामा जारी है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार देखने को मिली। सदन के नेता जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच लोकतंत्र और अहंकार जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। इस दौरान नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधा और उन्हें ‘अबोध बालक’ कह दिया। नड्डा और खरगे के बीच हुई इस तकरार के बीच सभापति ने भी टिप्पणी की। जानिए किसने क्या कहा?
नड्डा ने विपक्ष के रवैये पर उठाए सवाल
राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति की अनुमति से जेपी नड्डा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हर समय और सभी विषयों पर चर्चा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि लोकसभा में पीएम मोदी जवाब देने के लिए तैयार बैठे रहे, लेकिन विपक्ष ने लोकसभा को चलने नहीं दिया। जहां तक राज्यसभा का सवाल है, विपक्ष ने कहा कि सरकार भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान दे। इसके बाद पीयूष गोयल ने बयान दिया। बयान पर कहा गया कि ट्रेड डील का ब्योरा साझा किया जाए। सरकार ने कहा कि विवरण तैयार होने के बाद आने वाले दिनों में सबको बता दिया जाएगा।
‘पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए’
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों के रवैये को लेकर नड्डा ने कहा, विपक्ष के नेता ने निर्धारित समय से 20 मिनट अधिक समय तक भाषण दिया। हमने कोई आपत्ति नहीं की। कई और अहम टिप्पणियों के बीच नड्डा ने कहा, ‘आप हमसे बहुत सीनियर हैं… एक बात मैं जरूर निवेदन करूंगा। अपनी पार्टी को अबोध बालक का बंधक मत बनाइए। आप इतने समझदार हैं, होशियार और तजुर्बेकार हैं। आपको पार्टी के अंदर भी इस बात को समझाना चाहिए कि लोकतांत्रिक तरीके से ही हमें काम करना है। अबोध और अहंकार का जोड़ बहुत घातक होता है। इससे बचकर रहें। पार्टी को बंधक न बनने दें। आप पार्टी को स्वतंत्र रूप से चलाइए।’
खरगे ने किया पलटवार
जेपी नड्डा की टिप्पणी पर मल्लिकार्जुन खरगे ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, ‘आपकी पार्टी तो ऐसी है जहां कोई बोलता ही नहीं। आपको तो मोदी जी ने बंधक बना लिया है।’ खरगे ने कहा कि आप बिना उनकी राय के कोई बात नहीं कर सकते। उन्होंने सत्ता पक्ष के लिए बंधुआ मजदूर जैसे शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे बाद में सभापति ने सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
लोकसभा की बात राज्यसभा में क्यों?
खरगे ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष के नेता को लोकसभा में चार-चार दिन बोलने नहीं दिया जाएगा, तो यह मुद्दा राज्यसभा में उठेगा। उन्होंने कहा कि हम स्वतंत्र नहीं हैं और लोकसभा-राज्यसभा को मिलाकर ही देश की संसद बनती है। इस बहस के दौरान सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की।

By Aryavartkranti Bureau

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