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13 May 2026, Wed

ईरान पर US के दो सुर: ट्रंप-रुबियो के विरोधाभासी बयानों से ईरान युद्ध पर बढ़ी अनिश्चितता

वॉशिंगटन, एजेंसी। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राइल के सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को लेकर अमेरिकी प्रशासन के भीतर ही अलग-अलग संकेत सामने आने लगे हैं। एक तरफ विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि अभियान अपने लक्ष्य हासिल करने के बाद समाप्त हो चुका है और अब वॉशिंगटन वार्ता के जरिए समाधान चाहता है। दूसरी ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान प्रस्तावित समझौते पर सहमत नहीं हुआ तो सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं और उनकी तीव्रता पहले से अधिक होगी। इसी बीच होर्मुज जलमार्ग में जहाजों की सुरक्षा के लिए शुरू किया गया अमेरिकी मिशन प्रोजेक्ट फ्रीडम भी फिलहाल रोक दिया गया है। इन घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया में तनाव अभी समाप्त नहीं हुआ, बल्कि अब संघर्ष सैन्य मोर्चे से कूटनीतिक दबाव की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। अल जजीरा व अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत में कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का उद्देश्य पूरा हो चुका है और अमेरिका अब किसी नए सैन्य टकराव के बजाय समझौते का रास्ता तलाशना चाहता है। उन्होंने संकेत दिया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता से ईरान और अमेरिका के बीच प्रत्यक्ष बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। पिछले महीने इस्लामाबाद में हुई प्रारंभिक वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची थी, पर दोनों देशों ने बाद में नए प्रस्ताव एक-दूसरे को भेजे हैं। रुबियो के अपेक्षाकृत नरम बयान के तुरंत बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा, ऑपरेशन तभी पूरी तरह समाप्त माना जाएगा जब ईरान तय शर्तों को स्वीकार करेगा। अगर वार्ता विफल हुई तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

By Aryavartkranti Bureau

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