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24 Jan 2026, Sat

बुढ़ापे में शिंगल्स वैक्सीन लगवाने से कम स्पीड से बढ़ी शरीर की उम्र, जंग की किम की स्टडी में दिखा पैटर्न

कब कौन-सी चीज क्या असर दिखा देगी, ये कोई नहीं जानता। अब शोधकर्ताओं को अपनी स्टडी में एक दिलचस्प पैटर्न देखने को मिला है। उन्होंने देखा कि शिंगल्स की वैक्सीन लगवाने से शरीर की उम्र धीमी स्पीड से बढ़ती है। यह टीका बुजुर्गों में शिंगल्स बीमारी से बचाने के लिए लगाया जाता है।
हर कोई चाहता है कि उसका शरीर ज्यादा से ज्यादा दिन तक जवान रह सके। क्योंकि बुढ़ापे में शरीर के काम करने की क्षमता गिरने लगती है। इसके साथ दिल, दिमाग, किडनी आदि की बीमारियां भी शिकार बना सकती हैं। यह शोध यूएससी लियोनार्ड डेविस स्कूल ऑफ गैरोन्टोलॉजी के रिसर्चर्स ने किया, जिसकी प्रमुख लेखक रिसर्च एसोसिएट प्रोफेसर Jung Ki Kim थीं।
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यूएस हेल्थ एंड रिटायरमेंट स्टडी के आंकड़ों पर हुआ अध्ययन
शोधकर्ताओं ने यूएस हेल्थ एंड रिटायरमेंट स्टडी के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें साल 2016 में 70 या उससे बुजुर्ग 3800 प्रतिभागियों में शिंगल्स वैक्सीन का बायोलॉजिकल एजिंग पर होने वाले असर का शोध किया गया। बाकी कारकों को नियंत्रित करने के बाद भी देखा गया कि शिंगल्स वैक्सीन लेने वाले लोगों की बायोलॉजिकल एज इसे ना लेने वालों के मुकाबले कम स्पीड से बढ़ी है।
पहले की स्टडी को मिली मजबूती
स्टडी की प्रमुख लेखकर जंग कि किम का कहना है कि यह रिजल्ट शिंगल्स वैक्सीन पर हुई पहले शोधों को मजबूती देती है। इन शोध में देखा गया था कि शिंगल्स और इंफ्लुएंजा जैसी वैक्सीन बीमारी से बचाव करने के साथ डिमेंशिया और अन्य न्यूरोडिजेनेरिटव डिसऑर्डर का खतरा भी कम करने में मदद कर सकती हैं।
कारण अभी नहीं पता
लेखक का कहना है कि यह शोध एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है। लेकिन इस असर के पीछे के कारण का पता लगाना अभी बाकी है। इस बात की जरूर खुशी मना सकते हैं कि वैक्सीन का यह असर बुढ़ापे में हेल्दी जीने में काफी मदद कर सकता है।
इंफ्लामेशन में भी कमी
वैक्सीन से शरीर की अंदरुनी इंफ्लामेशन में कमी भी देखी गई है। जो कि बायोलॉजिकल एजिंग बढ़ाने में एक बड़ा कारक हो सकता है। लंबे समय तक इंफ्लामेशन का कम लेवल भी अंगों और सेल्स के कामकाज में गिरावट ला सकता है।
शिंगल्स और बायोलॉजिकल एजिंग का मतलब
बायोलॉजिकल एजिंग को शरीर की असली उम्र कहा जाता है। मतलब आपके अंग किस उम्र के मुताबिक काम कर रहे हैं। 30 की उम्र में भी आपकी बायोलॉजिकल एज 45 हो सकती है और 45 की उम्र में बायोलॉजिकल एज 30 भी हो सकती है। दूसरी तरफ शिंगल्स (हर्पीज जोस्टर) बुढ़ापे में होने वाला एक स्किन रैशेज इंफेक्शन है, जिसमें दर्दनाक छाले हो जाते हैं। इसके पीछे चिकनपॉक्स वाला वायरस ही होता है, जो शरीर में छिपा रहता है।

डिस्क्लेमर : सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से विशेषज्ञ राय का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ से परामर्श करें। आर्यावर्त क्रांति इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

By Aryavartkranti Bureau

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