लेटेस्ट न्यूज़
19 May 2026, Tue

400 किमी दूर दुश्मन को करेगा तबाह, भारत का सुपर शील्ड सिस्टम टेस्ट के लिए तैयार

नई दिल्ली। भारत अपने रक्षा क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल करने के बेहद करीब है। देश में ही विकसित किए जा रहे एडवांस लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम यानी ‘प्रोजेक्ट कुशा’ का पहला मिसाइल टेस्ट जुलाई के आखिरी हफ्ते में होने जा रहा है। इस टेस्ट के साथ ही भारत दुश्मन के हवाई हमलों को हवा में ही तबाह करने वाले ‘सुपर शील्ड’ नेटवर्क को तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाएगा।
​जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को DRDO तैयार कर रहा है। इसके तहत बनने वाले सिस्टम को ERADS (एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम) कहा जाता है। यह भारत का स्वदेशी ‘S-400’ सिस्टम होगा, जो रूस से खरीदे गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की तरह ही ताकतवर होगा और विदेशी हथियारों पर भारत की निर्भरता को खत्म करेगा।
M1 मिसाइल (दूरी: 150 किमी): जुलाई के अंत में इसी बेस मिसाइल का पहला टेस्ट होने जा रहा है।
M2 मिसाइल (दूरी: 250 किमी): यह बड़े बूस्टर के साथ आएगी जो मध्यम दूरी के खतरों को रोकेगी।
M3 मिसाइल (दूरी: 350 से 400 किमी): यह सबसे बाहरी कवच होगा, जो दुश्मन को भारत की सीमा से 400 किलोमीटर दूर ही ढेर कर देगा।
​इंटरनेट की तरह आपस में जुड़ा नेटवर्क
प्रोजेक्ट कुशा की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल और नेटवर्क-सेंट्रिक होना है। यह वायुसेना के IACCS और थल सेना के ‘आकाशतीर’ (Akashteer) ऑटोमेटेड नेटवर्क से सीधे जुड़ जाएगा। आधुनिक रडार (MFCR) की मदद से तीनों सेनाएं रीयल-टाइम में डेटा शेयर कर सकेंगी, जिससे खतरा देखते ही कंप्यूटर खुद तय कर लेगा कि किस मिसाइल को पहले फायर करना है।
​बजट और मैन्युफैक्चरिंग
भारतीय वायुसेना ने इस सिस्टम की 5 स्क्वाड्रन खरीदने को हरी झंडी दे दी है। सरकार ने इसके लिए 21,700 करोड़ के बजट (AoN) को मंजूरी दी है। वायुसेना के बाद इसे नौसेना के युद्धपोतों के लिए भी तैयार किया जाएगा।​’आत्मनिर्भर भारत’ के तहत इसके निर्माण की जिम्मेदारी सरकारी कंपनियों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) को सौंपी गई है।
आगे की राह
जुलाई का यह टेस्ट मिसाइल के प्रोपल्शन (इंजन) और सीकर (टारगेट ढूंढने वाले सिस्टम) को जांचने के लिए बेहद अहम है। माना जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा, तो 2028 से 2030 के बीच यह सिस्टम पूरी तरह भारतीय फोर्स का हिस्सा बन जाएगा।

​कितना खतरनाक है यह सिस्टम?
सुपरसोनिक रफ्तार: इसकी मिसाइलें मैक 5।5 (Mach 5.5) की तूफानी रफ्तार (ध्वनि की गति से साढ़े पांच गुना तेज) से उड़ेंगी।
सटीक निशाना: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका सिंगल-शॉट किल प्रोबेबिलिटी (एक बार में टारगेट को तबाह करने की क्षमता) 80% से ज्यादा है।
​किन खतरों को मिटाएगा: यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों, स्टील्थ ड्रोन, सबसोनिक क्रूज मिसाइलों और आसमान से नजर रखने वाले भारी AWACS (अवाक्स) विमानों को पलक झपकते ही नष्ट कर सकता है।

By Aryavartkranti Bureau

आर्यावर्तक्रांति दैनिक हिंदी समाचार निष्पक्ष पत्रकारिता, सामाजिक सेवा, शिक्षा और कल्याण के माध्यम से सामाजिक बदलाव लाने की प्रेरणा और सकारात्मकता का प्रतीक हैं।