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9 Jul 2026, Thu

सोनम वांगचुक ने संसद मार्च का किया आह्वान, 20 जुलाई को दिल्ली पहुंचने की अपील

सोनम वांगचुक द्वारा 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च की घोषणा की प्रतीकात्मक तस्वीर

सोनम वांगचुक संसद मार्च 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के दिन आयोजित करने का आह्वान किया गया है। शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देशभर के नागरिकों से दिल्ली पहुंचकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य लद्दाख, पर्यावरण संरक्षण और संवैधानिक मुद्दों को संसद तक पहुंचाना है।

वांगचुक ने स्पष्ट किया कि यह मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसमें शामिल होने वाले सभी लोगों से कानून का पालन करने तथा अहिंसक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को संसद तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम शांतिपूर्ण आंदोलन है। अधिक राष्ट्रीय समाचार के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहें।

सोनम वांगचुक संसद मार्च क्यों कर रहे हैं?

सोनम वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन केवल लद्दाख तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा और भविष्य की पीढ़ियों के हितों से जुड़ा हुआ है। उनका मानना है कि इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है और संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच है, जहां इन विषयों पर ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए।

सोनम वांगचुक संसद मार्च कब होगा?

वांगचुक ने घोषणा की है कि 20 जुलाई, जब संसद का मानसून सत्र शुरू होगा, उसी दिन दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने देशभर के छात्रों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

सोनम वांगचुक संसद मार्च से पहले अनशन जारी

संसद मार्च की घोषणा ऐसे समय हुई है जब सोनम वांगचुक लगातार अनशन पर हैं। उनके समर्थकों ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताई है। इसके बावजूद वांगचुक ने कहा है कि उनका आंदोलन अहिंसक रहेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप जारी रहेगा।

पर्यावरण और लद्दाख के मुद्दे

वांगचुक लंबे समय से हिमालयी पारिस्थितिकी, जल संरक्षण और लद्दाख के पर्यावरणीय संतुलन को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर पर्वतीय क्षेत्रों पर तेजी से दिखाई दे रहा है और इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाने की जरूरत है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से संसद मार्च के आह्वान पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन सकता है।

लोकतांत्रिक तरीके से विरोध की अपील

वांगचुक ने अपने संदेश में कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण तरीके से मार्च में शामिल हों और सार्वजनिक व्यवस्था का सम्मान करें।

निष्कर्ष

सोनम वांगचुक ने संसद मार्च का किया आह्वान कर एक बार फिर पर्यावरण और लद्दाख से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में लाने की कोशिश की है। अब सभी की नजर 20 जुलाई पर रहेगी, जब संसद के मानसून सत्र के पहले दिन प्रस्तावित यह शांतिपूर्ण मार्च आयोजित होने की योजना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पहल को कितना जनसमर्थन मिलता है और आगे सरकार की क्या प्रतिक्रिया रहती है।

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