इंफाल। जनगणना से पहले मणिपुर में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (NRC) लागू करने की मांग तेज हो गई है। इसी मांग को लेकर एक छात्र संगठन द्वारा बुलाए गए 48 घंटे के राज्यव्यापी बंद के दूसरे दिन बुधवार को घाटी के पांच जिलों में जनजीवन प्रभावित रहा। बाजार, शिक्षण संस्थान और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी ठप रहीं। हालांकि कुछ इलाकों में निजी वाहन चलते नजर आए।
बंद का असर मुख्य रूप से घाटी तक सीमित रहा। पहाड़ी जिलों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं। इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने बांस के खंभे और बड़े पत्थर रखकर सड़कें जाम कर दीं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘नो NRC, नो सेंसस’ लिखे पोस्टर लगाकर विरोध जताया।
थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में भी बंद का असर देखने को मिला। सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति कम रही और शिक्षण संस्थान बंद रहे।
पहाड़ी जिलों में बंद का असर नहीं
‘कैंपेन फॉर जस्ट एंड फ्री डिलिमिटेशन’ (JFD) की ओर से बुलाए गए बंद का पहाड़ी जिलों में खास असर नहीं दिखा। चुराचांदपुर समेत अन्य पहाड़ी इलाकों में सामान्य गतिविधियां जारी रहीं।
राज्य सरकार के प्रवक्ता और विधायक सपम रंजन सिंह ने मंगलवार को कहा था कि विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाकर केंद्रीय नेताओं से मुलाकात करेगा। इस दौरान उन्हें जनगणना से पहले NRC लागू करने की स्थानीय लोगों की मांग से अवगत कराया जाएगा।
17 अगस्त से शुरू हुआ सेल्फ-एन्यूमरेशन चरण
जनगणना 2027 के तहत लोगों द्वारा खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ चरण 17 अगस्त से शुरू होना था। इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर के बीच मुख्य हाउस-लिस्टिंग प्रक्रिया चलेगी।
इसी समयसीमा को देखते हुए मणिपुर में NRC लागू करने की मांग ने जोर पकड़ा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने से पहले NRC लागू किया जाना चाहिए, ताकि अवैध प्रवासियों की पहचान की जा सके।
सेंसस कार्यालय के बाहर भी प्रदर्शन
NRC की मांग को लेकर छात्रों ने रविवार को इंफाल स्थित डायरेक्टरेट ऑफ सेंसस ऑपरेशन्स के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े।
इससे पहले 16 अगस्त की शाम इंफाल ईस्ट और इंफाल वेस्ट में सैकड़ों लोगों ने मशाल रैली भी निकाली थी। प्रदर्शनकारियों ने जनगणना से जुड़ी गतिविधियां शुरू होने से पहले NRC लागू करने की मांग दोहराई।
सरकार ने NRC की मांग का समर्थन किया
मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार लंबे समय से NRC की मांग का समर्थन करती रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा इस मुद्दे पर पहले ही प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को इसकी जानकारी दे चुकी है। मणिपुर विधानसभा ने 2022 में भी NRC को लेकर प्रस्ताव पारित किया था।
हालांकि मुख्यमंत्री ने बंद और सड़क जाम के बजाय विरोध का कोई दूसरा तरीका अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंद और नाकेबंदी का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों पर पड़ता है।

