लखनऊ में कौशल प्रशिक्षण केंद्रों पर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार, भुगतान और परीक्षा में देरी से बढ़ी नाराजगी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन से जुड़े प्रशिक्षण प्रदाताओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। सोमवार को अलीगंज स्थित कौशल विकास विभाग के कार्यालय के बाहर सैकड़ों प्रशिक्षण पार्टनर्स ने कार्य बहिष्कार करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। प्रशिक्षण प्रदाताओं का आरोप है कि महीनों से भुगतान लंबित है, परीक्षाएं नहीं हो रही हैं और प्रशासनिक व तकनीकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश कौशल प्रशिक्षण प्रदाता एसोसिएशन ने अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के प्रशिक्षण केंद्रों में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है। एसोसिएशन का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की ओर से समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए। अब प्रशिक्षण प्रदाताओं ने लिखित आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
भुगतान को लेकर तय की समयसीमा
प्रशिक्षण प्रदाताओं ने विभाग के सामने भुगतान को लेकर समयसीमा रखी है। उनकी मांग है कि 5 सितंबर तक सभी सत्यापित और एडवांस SSDF बैचों का भुगतान किया जाए। वहीं, 30 सितंबर तक पुराने बैचों का मूल्यांकन पूरा कर लंबित भुगतान का निपटारा करने की मांग की गई है।
इसके अलावा 600 घंटे या उससे कम अवधि वाले बैचों में निर्धारित उपस्थिति पूरी होते ही एडवांस भुगतान की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की गई है।
डिबार प्रशिक्षण प्रदाताओं को बहाल करने की मांग
प्रदर्शनकारियों ने डिबार किए गए प्रशिक्षण प्रदाताओं को 25 अगस्त तक बहाल करने की मांग उठाई। साथ ही उपस्थिति नियमों में लचीलापन और बैच एक्सटेंशन की प्रक्रिया में राहत देने की मांग भी की गई है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी 10 सूत्रीय मांगों पर लिखित और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक कार्य बहिष्कार और तालाबंदी जारी रहेगी।
पांच साल से परीक्षा का इंतजार कर रहे करीब दो लाख छात्र
प्रशिक्षण पार्टनर विकास माहेश्वरी ने दावा किया कि करीब दो लाख छात्रों की परीक्षाएं पिछले पांच वर्षों से लंबित हैं। उनके मुताबिक, कई छात्रों को प्रशिक्षण के बाद नौकरी तो मिल जाती है, लेकिन प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण बाद में उन्हें नौकरी से हटा दिया जाता है।
उनका आरोप है कि जिस संस्था को प्रदेश में परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, उसका भुगतान सरकार की ओर से रोक दिया गया। इसके चलते संस्था लंबे समय से परीक्षाएं नहीं करा पा रही है। प्रशिक्षण प्रदाताओं का कहना है कि सरकार ने अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है।
रोजगार मेलों के आंकड़ों पर भी सवाल
प्रशिक्षण पार्टनर्स ने रोजगार मेलों की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि कई रोजगार मेले सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं। कंपनियां बुलाए जाने के बावजूद वास्तविक प्लेसमेंट के आंकड़े दावों से काफी अलग हैं।
हालांकि, एक अन्य प्रशिक्षण पार्टनर ने माना कि रोजगार मेलों के जरिए छात्रों को नौकरियां मिलती हैं, लेकिन प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण कई युवाओं को बाद में नौकरी गंवानी पड़ती है। प्रशिक्षण प्रदाताओं का कहना है कि इससे सरकार के रोजगार संबंधी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखाई देता है।
1100 से ज्यादा ट्रेडों में प्रशिक्षण
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत प्रदेशभर में 1100 से अधिक ट्रेडों में छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण प्रदाताओं का कहना है कि अधिकांश क्षेत्रों में अब तक परीक्षाएं लंबित हैं। पार्टनर्स के साथ हुए एमओयू में समय पर परीक्षा और भुगतान का प्रावधान होने के बावजूद दोनों ही मोर्चों पर देरी का आरोप लगाया जा रहा है।
प्रशिक्षण प्रदाताओं को आशंका है कि लगातार देरी के कारण छात्र दूसरे क्षेत्रों का रुख कर सकते हैं। इससे युवाओं के भविष्य के साथ-साथ प्रशिक्षण प्रदाताओं के लंबित भुगतान पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल प्रशिक्षण प्रदाताओं ने विभाग से जल्द समाधान की मांग करते हुए आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है।

Aryavartkranti Bureau
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