नई दिल्ली, एजेंसी। 2026 की शुरुआत इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के लिए खास अच्छी नहीं रही। भारत ने PSLV-C62 मिशन के साथ साल का पहला लॉन्च करने की कोशिश की, लेकिन सिर्फ 10 मिनट बाद ही रॉकेट अपने तय रास्ते से भटक गया। सोमवार सुबह लॉन्च होने के 10 मिनट बाद ही रॉकेट ने अपने तय किए गए ऑर्बिट को नहीं मारा और रास्ते से भटक गया। मिशन में 16 सैटेलाइट्स शामिल थीं, जिनमें मुख्य था धरती का ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-N1, इसके साथ आठ विदेशी सैटेलाइट्स भी थे, जो अब पूरी तरह से खो गए हैं।
पीएसएलवी की पहली बार लगातार दो बार विफलता
पीएसएलवी रॉकेट, जो ISRO के सबसे भरोसेमंद रॉकेट्स में से एक माना जाता है, अब तक 64 मिशनों में केवल 4 बार ही फेल हुआ था। लेकिन यह पहली बार हुआ कि PSLV ने लगातार दो बार लॉन्च फेल हुआ। पिछले साल मई में पीएसएलवी सी61, जो EOS-09 सैटेलाइट लेकर गई थी, तीसरे स्टेज में समस्या के कारण ऑर्बिट तक नहीं पहुच पाया था।
पिछले पीएसएलवी फेल का कारण
PSLV-C61 के पिछले साल मई में फेल होने की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई थी। लेकिन ISRO चेयरपर्सन वी नारायणन ने कहा कि रॉकेट के प्रेशर चैम्बर में अचानक प्रेशर ड्रॉप हुआ था, जिसके कारण मिशन फेल हुआ। PSLV-C62 की विफलता का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और Failure Analysis Committee (FAC) इसे जांच रही है।
मिशन का अन्य उद्देश्य क्या था?
इस मिशन में सिर्फ धरती के ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट नहीं था। साथ में स्पेनिश स्टार्टअप का KID कैप्सूल भी था, जो एक छोटे पैमाने का री-एंट्री प्रोटोटाइप है। इसे लॉन्च के दो घंटे बाद रॉकेट के चौथे स्टेज PS4 की मदद से डीकॉस्ट किया जाना था और साउथ पैसिफिक में सुरक्षित लैंडिंग करनी थी। PSLV-C62 मिशन ISRO की वाणिज्यिक लॉन्च क्षमता को भी मजबूत करता है। NSIL इसे कई घरेलू और विदेशी कस्टमर्स के लिए एक ही मिशन में लॉन्च सर्विस देने के लिए इस्तेमाल करता है। यह मिशन पूरी तरह से ISRO की तकनीकी और व्यावसायिक क्षमताओं को दिखाता है।
इसरो की साल की पहली लॉन्चिंग असफल, 14 सैटेलाइट ले जा रहा पीएसएलवी सी-62 रॉकेट तीसरी स्टेज में रास्ते से भटका

