नई दिल्ली, एजेंसी। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपए के कथित घोटाले मामले में आज यानी मंगलवार को बड़ा एक्शन हुआ है। बैंक से 556 करोड़ रुपए की रिकवरी के साथ ही करीब 25 करोड़ रुपए की ब्याज राशि रिकवर कर ली गई है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने हरियाणा विधानसभा में जानकारी दी है कि सिर्फ 24 घंटे के अंदर ही सरकार ने IDFC First Bank से गबन की गई राशि को रिकवर कर लिया गया है।
590 करोड़ रुपए में से 556 करोड़ रुपए हरियाणा सरकार के अन्य बैंकों के खातों में IDFC बैंक के द्वारा ट्रांसफर कर दिए गए हैं। बैंक से पूरी रिकवरी 24 घंटे के दौरान ही कर ली गई है।
वित्त सचिव की अध्यक्षता में इस पूरे मामले को लेकर एक हाई लेवल कमेटी बनाई गई है जो आगे भी इस मामले की जांच जारी रखेगी ताकि पता लग सके कि बैंक कर्मचारियों के साथ कहीं हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों के अधिकारी या कर्मचारी तो इस गबन की सांठ-गांठ में शामिल नहीं थे। बैंक भी अपनी और से जांच जारी रहेगी।
सीएम ने क्या कहा था?
इससे पहले सीएम ने कहा था कि सरकार के पैसे पुराने समय से अलग-अलग बैंकों में रखे जाते हैं। IDFC First Bank में हमारे कुछ विभागों के पैसे थे। सरकार ने प्रो-एक्टिव होकर बैंक खातों का मिलान किया तो पाया कि कुछ खातों का मिलान नहीं है। जनवरी माह के मध्य में कुछ खातों का मिलान नहीं हो पाया था। लेकिन हमने तुरंत बैंक को खाता बंद करने के लिए निर्देशित किया।
उन्होंने आगे कहा कि बैंक ने 21 तारीख को पत्र लिखा जबकि उससे पहले ही सरकार की तरफ से बैंक से कम्युनिकेशन कर लिया गया था। इसके साथ ही सरकार ने बैंक को संपूर्ण राशि ब्याज सहित अधिकृत बैंक में स्थानांतरित करने को कहा है। इसमें बैंक के कर्मचारियों की भूमिका सामने आ रही है। हरियाणा सरकार के विभागों ने इस मामले को ध्यान में लाया है। हरियाणा सरकार ने पूरा मामला एंटी करप्शन ब्यूरो को जांच करने के लिए दिया है।

