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16 May 2026, Sat

गिग वर्कर्स की आज 5 घंटे की हड़ताल, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से हैं नाराज

नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा किया है, जिसको लेकर लोगों में काफी नाराजगी है। इस बीच गिग वर्कर्स ने शनिवार (16 मई) को अस्थायी राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसके तहत देशभर में ऐप आधारित टैक्सी ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स से ईंधन की बढ़ती कीमतों और कम भुगतान दरों के विरोध में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक सेवाएं बंद करने को कहा गया है। गिग और प्लेटफॉर्म सर्विसेज वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने श्रमिकों से इस बंद में शामिल होने की अपील की है। यूनियन का कहना है कि लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों और कम भुगतान दरों की वजह से हजारों ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा ‘GIPSWU देश भर के गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स से अपील करता है कि वो ईंधन की बढ़ती कीमतों और अपर्याप्त भुगतान दरों के विरोध में दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप-आधारित सेवाओं का अस्थायी रूप से बंद रखें’। यूनियन का कहना है कि ऐप कंपनियां किराए और इंसेंटिव में पर्याप्त बढ़ोतरी नहीं कर रही हैं, जबकि ड्राइवरों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है।
यह विरोध प्रदर्शन तेल कंपनियों द्वारा ईंधन की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि के विरोध में हो रहा है। हाल ही में सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97।77 रुपए प्रति लीटर और डीजल 90।67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। वहीं हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत 110।8 रुपए प्रति लीटर और डीजल 98।9 रुपये प्रति लीटर हो गया है। बताया जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। ऐप आधारित कैब ड्राइवर मोहम्मद ने कहा कि हर बार जब पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं, तो उनका खर्च तुरंत बढ़ जाता है लेकिन किराए में उसी हिसाब के बढ़ोतरी नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि कमीशन और ईंधन का खर्च निकालने के बाद बहुत कम पैसा बचता है। कई बार घर चलाना भी मुश्किल हो जाता है।
वहीं कई ड्राइवरों और डिलीवरी वर्कर्स का कहना है कि उनका अधिकांश समय सड़क पर गुजरता है, इसलिए ईंधन की बढ़ी कीमतें सीधे उनकी कमाई को प्रभावित करती हैं। उनका कहना है कि ईंधन की लागत उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा ले लेगी, जबकि ऐप कंपनियों ने बढ़ते खर्च के अनुरूप किराए में पर्याप्त वृद्धि नहीं की है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने शुक्रवार (15 मई) को ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की, जिसके चलते महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई। वहीं, पाइपलाइन से आने वाली रसोई गैस की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल कंपनियों के अधिकारियों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी भविष्य में हो सकती है, लेकिन यह सरकार की मंजूरी और इस बात पर निर्भर करेगा कि बढ़ोतरी कब और कितनी की जाए।
तेल कंपनियों पर भी बढ़ा दबाव
तेल कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक, हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, तेल कंपनियां अभी भी अपनी लागत पूरी तरह से वसूल नहीं कर पा रही हैं। क्रिसिल का अनुमान है कि सरकारी ईंधन खुदरा विक्रेताओं को पेट्रोल पर लगभग 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
भारत में ईंधन की कीमतें वैश्विक तेल कीमतों और करों से जुड़ी हुई हैं। भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की लागत में 53% की वृद्धि हुई है, जो फरवरी में औसतन 69 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर मई में अब तक 106 डॉलर से अधिक हो गई है। इस अवधि के दौरान, पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में लगभग 75% की वृद्धि हुई है।
अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य
गिग वर्कर्स का कहना है कि इस अस्थायी हड़ताल का उद्देश्य सरकार और ऐप कंपनियों तक यह संदेश पहुंचाना है कि बढ़ती महंगाई और कम भुगतान के बीच उनके लिए परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। उनका मानना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जा सकता है।

By Aryavartkranti Bureau

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