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6 Mar 2026, Fri

ईरान के हमले झेलने वाले खाड़ी देश अमेरिका से नाराज, कहा- न हमें पहले जानकारी दी और न फिर बचाया

वॉशिंगटन, एजेंसी। ईरान अपने ऊपर अमेरिका और इजराइल की ओर से किए गए हमलों का मुंहतोड़ जवाब दे रहा है, साथ ही वह उन देशों पर भी ताबड़तोड़ हमला कर रहा है जो अमेरिका के दोस्त हैं। लेकिन अब खबर आ रही है कि ट्रंप प्रशासन को फारस की खाड़ी में अपने साथी देशों की बढ़ती नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी शिकायत है कि उन्हें अमेरिका और इजराइल के अटैक के बदले में अपने देशों पर ईरानी ड्रोन और मिसाइलों के हमले से तैयारी करने का पूरा समय नहीं दिया गया।
समाचार एजेंसी एपी ने सूत्रों के हवाले से अपनी खबर में दावा किया कि दो खाड़ी देशों के अफसरों का कहना है कि उनकी सरकारें अमेरिका के युद्ध को संभालने के तरीके से बेहद निराश हैं, खासकर पिछले शनिवार को ईरान पर शुरुआती हमले के बाद से। उन्होंने कहा कि उनके देशों को अमेरिका और इजराइली हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी, और यह भी शिकायत है कि अमेरिका ने उनकी चेतावनियों को नजरअंदाज़ कर दिया था कि अगर जंग छिड़ा तो पूरे इलाके के लिए नतीजा भुगतना पड़ेगा और इसके खतरनाक नतीजे होंगे। एक अधिकारी ने कहा, “खाड़ी के देश बेहद निराश हैं, और काफी गुस्से में भी हैं क्योंकि अमेरिका सेना ने उनका ठीक से बचाव नहीं किया।” उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में यह माना जा रहा है कि ऑपरेशन इजराइल और अमेरिकी सैनिकों को ही बचाने पर फोकस रहा, जबकि खाड़ी के देशों को खुद को बचाने के लिए छोड़ दिया गया और दावा किया कि उनके देश के इंटरसेप्टर का स्टॉक “तेजी से कम हो रहा है।” खाड़ी के इन अधिकारियों ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बात की। खाड़ी के अहम देशों सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों से इस बारे में सवाल किए जाने पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
खाड़ी देशों की नाराजगी और बढ़ते तनाव के बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने कहा ईरान के जवाबी बैलिस्टिक मिसाइल हमले 90 फीसदी तक कम कर दिए गए हैं क्योंकि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी उनके हथियारों को निशाना बनाने या और तैयार करने की उनकी काबिलियत को खत्म कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप हमारे सभी क्षेत्रीय साझेदारों के साथ लगातार संपर्क में हैं, और ईरानी सरकार की ओर अपने पड़ोसियों पर हमले यह साबित करते हैं कि ट्रंप के लिए हमारे देश और हमारे साथियों के लिए इस खतरे को खत्म करना कितना जरूरी हो गया था। हालांकि इस मसले पर पेंटागन की ओर से भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इस मसले पर खाड़ी के अरब देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं अभी खुलकर नहीं आई हैं, लेकिन उनकी सरकारों से करीबी रिश्ते रखने वाले कई बड़े चेहरों ने अमेरिका की यह कहते हुए खुलकर आलोचना की है, कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बेवजह की लड़ाई में घसीट दिया है। सऊदी अरब के पूर्व इंटेलिजेंस चीफ, प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने 2 दिन पहले बुधवार को CNN को बताया, “यह नेतन्याहू की जंग है”।

उन्होंने किसी तरह राष्ट्रपति (ट्रंप) को अपने विचारों का सपोर्ट करने के लिए मना लिया। पेंटागन के अधिकारियों ने भी इस हफ्ते सांसदों के साथ बंद कमरे में हुई ब्रीफिंग के दौरान माना कि वे ईरान के ड्रोन हमलों को रोकने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कुछ टारगेट, जिनमें सैनिक भी शामिल हैं, खतरे में पड़ गए। खाड़ी के देश ईरान के लिए आसान टारगेट बनकर उभरे हैं, जो ईरान की कम दूरी वाली मिसाइलों की रेंज में आत हैं और अमेरिकी सैनिकों, हाई-प्रोफाइल बिजनेस और टूरिस्ट जगहों और एनर्जी फैसिलिटीज एरिया जैसे टारगेट से भरे हुए हैं, जिससे दुनिया में तेल का फ्लो रुक रहा है। पिछले हफ्ते शनिवार से जंग शुरू होने के बाद से, ईरान ने आधिकारिक बयानों पर आधारित समाचार एजेंसी AP की गिनती के अनुसार, अरब खाड़ी के 5 देशों को निशाना बनाकर कम से कम 380 मिसाइलें और 1,480 से ज्यादा ड्रोन दागे गए हैं। स्थानीय अधिकारियों का मानना है कि हमले में उन देशों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। यही नहीं, रविवार को कुवैत में 6 अमेरिकी सैनिक तब मारे गए, जब एक ईरानी ड्रोन हमले के जरिए मुख्य आर्मी बेस से 10 मील से ज़्यादा दूर एक सिविलियन पोर्ट में एक ऑपरेशन सेंटर पर हमला हुआ।

सऊदी अरब में अमेरिका के पूर्व राजदूत माइकल रैटनी का मानना है कि खाड़ी देशों को ईरान को कमजोर होते देखने में दिलचस्पी रही है, लेकिन उन्हें चल रहे युद्ध को लेकर भी चिंताएं भी हैं, जिसमें इससे होने वाला आर्थिक नुकसान और अस्थिरता और इसका खुला हुआ रूप शामिल है। रैटनी, जो अब सेंटर फ़ॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ के मिडिल ईस्ट प्रोग्राम में सीनियर सलाहकार हैं, ने जारी जंग को लेकर कहा, आगे क्या होगा? खाड़ी के देशों को जो भी होगा उसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा।

By Aryavartkranti Bureau

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