नई दिल्ली, एजेंसी। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि अगर बातचीत से कोई नतीजा निकलता है, तो स्थिति को बिगड़ने से बचाया जा सकता है। लेकिन अगर बातचीत ठीक से नहीं हुई, या वे एक-दूसरे को समझ नहीं पाए या सहमत नहीं हुए, तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। आज यह कहना मुमकिन नहीं है कि क्या फिर से युद्ध होगा? आज दुनिया में कई जगहों पर इसका विरोध हो रहा है। ये विरोध यूरोप में और अमेरिका की जनता के द्वारा हो रहा है। हर जगह इसका विरोध हो रहा है। इजराइल में भी इसका विरोध हो रहा है।
सलमान खुर्शी उन्होंने कहा कि तो, क्या वहां के नेतृत्व में इतनी हिम्मत होगी कि वे फिर से युद्ध छेड़ दें, जबकि उन्हें अच्छी तरह पता है कि इसका पूरी दुनिया पर बुरा असर पड़ेगा? उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि फिर से कोई युद्ध न हो, बल्कि शांति बनी रहे। लेकिन बदकिस्मती से जो भूमिका हमें निभानी चाहिए थी कि हम शांति के दूत हैं और दुनिया को अच्छे सुझाव देते हैं। वह इस सरकार ने नहीं निभाई। सरकार बस मूक दर्शक बनी रही।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गहरी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए संघर्ष विराम में पाकिस्तान की भूमिका को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ा झटका बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम में पाक की भूमिका PM मोदी की कूटनीति के लिए एक बड़ा झटका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर “बमबारी और हमले” के अभियान को रोक दिया।
जयराम रमेश ने कहा कि दो हफ्ते के लिए दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा करते हुए ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसके बाद, ईरान ने भी ट्रंप की शांति पहल को स्वीकार कर लिया और दो हफ्ते के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ के रास्ते सुरक्षित मार्ग देने के साथ-साथ सैन्य अभियानों को रोकने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की मेजबानी करने में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है।
हमें जो करना था, वो नहीं कर पाए… पाकिस्तान में ईरान-अमेरिका वार्ता पर क्या बोले कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद

