तकनीक आधारित कृषि, वैज्ञानिक परामर्श, फसल नवाचार और किसान क्षमता निर्माण पर रहेगा जोर
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने देशभर में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के प्रसार, एआई-आधारित कृषि परामर्श सेवाओं के विस्तार तथा किसान क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारत की अग्रणी एग्रीटेक कंपनी एग्रोस्टार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।
आईसीएआर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के अधीन कार्यरत देश की सर्वोच्च कृषि अनुसंधान संस्था है, जो राष्ट्रीय स्तर पर कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार गतिविधियों के समन्वय एवं मार्गदर्शन का दायित्व निभाती है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने की। आईसीएआर की ओर से उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने पूसा परिसर/कृषि भवन में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
यह साझेदारी विश्व के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान नेटवर्क में से एक आईसीएआर तथा भारत के तेजी से उभरते किसान-केंद्रित एगटेक प्लेटफॉर्म एग्रोस्टार को एक साझा मंच पर लेकर आती है। आईसीएआर की शोध एवं विस्तार विशेषज्ञता और एग्रोस्टार के व्यापक डिजिटल किसान नेटवर्क के संयोजन से यह पहल कृषि उत्पादकता में वृद्धि, फसल हानि में कमी, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, खेती की लागत में कमी तथा किसानों के लिए बेहतर बाजार अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करेगी। यह सहयोग एग्रोस्टार के मिशन “Helping Farmers Win” को और अधिक सशक्त बनाएगा।
समझौते के तहत एग्रोस्टार और आईसीएआर तकनीकी ज्ञान हस्तांतरण, वैज्ञानिक फसल निदान प्रणाली, किसान परामर्श सेवाओं, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, फील्ड ट्रायल्स तथा कृषि प्रौद्योगिकियों के व्यावसायिक विस्तार जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इसमें उन्नत फसल किस्मों एवं हाइब्रिड्स, जैविक नवाचारों तथा सूक्ष्मजीव-आधारित अनुसंधान को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे टिकाऊ कृषि पद्धतियों को मजबूती मिल सके।
इस सहयोग के माध्यम से किसानों को रियल-टाइम कृषि सलाह, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज, उपग्रह एवं भू-स्थानिक विश्लेषण, एआई-संचालित फसल पूर्वानुमान, सटीक कृषि तकनीकों तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट्स तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। यह पहल पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य सुधार और वैज्ञानिक फसल योजना जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रभावी एवं डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगी।
यह पहल एग्रोस्टार के एशिया के सबसे बड़े एग्री एडवाइजरी सेंटर तथा आईसीएआर के देशव्यापी अनुसंधान संस्थानों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों की संयुक्त विशेषज्ञता का लाभ उठाएगी। आईसीएआर एवं केवीके के वैज्ञानिक फील्ड स्तर पर फसल निदान, किसान प्रशिक्षण, प्रदर्शन कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं का संचालन करेंगे, जबकि एग्रोस्टार अपने मजबूत जमीनी नेटवर्क के माध्यम से इन सेवाओं को किसानों तक अंतिम स्तर तक पहुँचाने का कार्य करेगा। यह साझेदारी भारतीय किसानों के बीच स्मार्ट कृषि उपकरणों, डिजिटल निर्णय सहायता प्रणालियों तथा सतत कृषि पद्धतियों के अपनाने को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इस अवसर पर एग्रोस्टार के उपाध्यक्ष-अनुसंधान एवं नियामक मामलों, डॉ. देवराज आर्य ने कहा, “यह साझेदारी भारतीय किसानों के लिए वैज्ञानिक कृषि को अधिक सुलभ, व्यावहारिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। आईसीएआर की शोध विशेषज्ञता और एग्रोस्टार की डिजिटल पहुंच एवं किसान सहभागिता तंत्र को एकीकृत कर हम ऐसे स्केलेबल और टिकाऊ समाधान विकसित करना चाहते हैं, जो कृषि उत्पादकता, मृदा स्वास्थ्य और किसान आय को सुदृढ़ करने में सहायक हों।”
यह सहयोग भारत के कृषि विकास लक्ष्यों के अनुरूप तकनीक-आधारित, जलवायु-अनुकूल और टिकाऊ कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक विशेषज्ञता, सटीक कृषि परामर्श और आधुनिक कृषि समाधानों तक पहुंच को मजबूत बनाकर यह पहल कृषि उत्पादकता, फसल गुणवत्ता, निर्यात क्षमता और दीर्घकालिक ग्रामीण समृद्धि को नई गति प्रदान करेगी।
एग्रोस्टार के बारे में-
वर्ष 2013 में स्थापित एग्रोस्टार भारत की एक अग्रणी एगटेक कंपनी है, जो देशभर में लाखों किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में परिवर्तनकारी समाधान उपलब्ध करा रही है। कंपनी का ओमनीचैनल प्लेटफॉर्म 10,000 से अधिक रिटेल स्टोर्स के नेटवर्क के माध्यम से किसानों तक व्यापक कृषि सेवाएँ पहुँचाता है। एग्रोस्टार किसानों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रीयल-टाइम एग्रोनॉमी एडवाइजरी, गुणवत्तापूर्ण कृषि इनपुट तथा वैश्विक बाजारों तक पहुँच जैसी समग्र कृषि समाधान सेवाएँ प्रदान करता है। कंपनी का उत्पाद पोर्टफोलियो 200 से अधिक उत्पादों पर आधारित है, जिसमें सतत कृषि को बढ़ावा देने वाले समाधान शामिल हैं। इनमें जैविक विकल्प, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने वाले उत्पाद, मृदा में जल धारण क्षमता बढ़ाने वाले समाधान तथा उच्च अंकुरण क्षमता वाले बीज शामिल हैं।

