श्रीलंका में स्थानीय चुनावों के लिए मतदान शुरू, देश के 1.7 करोड़ मतदाता चुन रहे शहर की सरकार

कोलंबो, एजेंसी। श्रीलंका में स्थानीय चुनाव को लेकर मतदान शुरू हो गया है। सुबह सात बजे से शुरू होकर शाम चार बजे तक चलने वाले मतदान में देश के 1.7 करोड़ मतदाता शहर की सरकार चुन रहे हैं। इन चुनावों को राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ नेशनल पीपुल्स पावर (एनपीपी) के लिए चुनावी परीक्षा माना जा रहा है।
चुनाव अधिकारियों ने बताया कि 13759 मतदान केंद्रों पर 339 स्थानीय निकायों के 8,287 सदस्यों को चुनने के लिए मतदान शुरू हो गया है। चुनाव में 49 राजनीतिक दलों और 257 स्वतंत्र समूहों के 75,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। निर्वाचित उम्मीदवारों का कार्यकाल चार साल का होगा।
तीन बार स्थगित हो चुके चुनाव
श्रीलंका में आखिरी बार स्थानीय चुनाव 2018 में हुए थे। 2022 में आर्थिक संकट और राजनीतिक अशांति के कारण स्थानीय चुनाव स्थगित कर दिए गए। इसके बाद 2023 में चुनाव आयोग ने दो बार तारीखों का एलान किया गया, लेकिन आर्थिक संकट का हवाला देते हुए तत्कालीन सरकार ने चुनाव स्थगित करा दिए। सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी गई। इस पर अदालत ने चुनाव जल्द कराने का आदेश दिया।
प्रथम वरीयता के आधार पर चुने जाएंगे 60 फीसदी सदस्य
चुनाव में 60 प्रतिशत स्थानीय परिषद सदस्य प्रथम वरीयता के आधार पर चुने जाएंगे। जबकि 40 प्रतिशत सदस्यों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर चुना जाएगा। साथ ही महिलाओं के लिए न्यूनतम 10 प्रतिशत तथा युवाओं के लिए 25 प्रतिशत प्रतिनिधित्व की गारंटी दी गई है।
दिसानायके सरकार की चुनावी परीक्षा
स्थानीय निकाय चुनाव राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके सरकार की बड़ी परीक्षा है। दिसानायके सरकार ने 2024 की अंतिम तिमाही में राष्ट्रपति और संसदीय चुनाव जीते थे। सितंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव में दिसानायके ने महज 42 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इसके बाद नवंबर में हुए संसदीय चुनाव में अपनी पार्टी एनपीपी को शानदार जीत दिलाई थी। दिसानायके अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की राहत की कठोर शर्तों को संशोधित करने के अपने चुनावी वादे को पूरा करने में विफल रहे हैं। वे पूर्ववर्ती रानिल विक्रमसिंघे द्वारा लगाए गए उन्हीं मितव्ययिता उपायों को जारी रखे हुए हैं।
दिसानायके ने मतदाताओं से स्वच्छ स्थानीय सरकार के लिए एनपीपी को चुनने का आग्रह किया। चुनाव प्रचार के दौरान दिसानायके ने कहा कि वह विपक्ष द्वारा जीती गई परिषदों के लिए धन जारी नहीं करेंगे। इसे लेकर उनकी आलोचना भी हुई। पर्यवेक्षकों ने कहा कि विभाजित विपक्ष अव्यवस्थित लग रहा है। साथ ही सत्तारूढ़ एनपीपी के लिए कोई चुनौती पेश नहीं कर रहा है।

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