नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले पर खुद संज्ञान लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि संरक्षित क्षेत्र में इस तरह का खनन कानूनन अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के बाद खुद ही संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी किया। सभी विभागों से जवाब मांगा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि चंबल नदी के किनारे बड़े पैमाने पर गैरकानूनी रेत खनन हो रहा है। इससे घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों का घर (हैबिटेट) नष्ट हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि राजस्थान में अभयारण्य की 732 हेक्टेयर जमीन हटाई गई।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी अलग-अलग राज्य सरकारों और विभागों से जवाब आने के बाद ही मामले पर विस्तार से फैसला किया जाएगा। लेकिन, फिलहाल कोर्ट ने साफ कर दिया कि संरक्षित क्षेत्रों में जानवरों के घर (हैबिटेट) को नुकसान पहुंचाना अपराध है। ऐसा करने पर कई कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
खनन पर कार्रवाई न करने वाले भी इसके जिम्मेदार- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर अवैध रेत खनन जारी है तो इसके लिए सिर्फ खनन करने वाले ही नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारी भी जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके साथ ही वन, खनन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश की पुलिस भी जिम्मेदार हैं। अगर ये लोग लापरवाही या चुप्पी बरतते हैं, तो वे भी प्राकृतिक जगहों के नुकसान के लिए प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार माने जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित सरकारों और अधिकारियों से जवाब मांगा है, इसके साथ ही वकीलों की मदद लेकर आगे सख्त फैसला लेने की तैयारी कर रहा है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों और इन राज्यों के पुलिस प्रमुखों (DGP) को खनन, वन और जल संसाधन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को के साथ-साथ सभी जिम्मेदारियों से इसका जवाब तलब किया जाए। इसके कोर्ट ने राज्यों और अधिकारियों से सवाल किया है कि खनन को लेकर अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई है। अगर नहीं की गई तो क्यों नहीं हुई है।

