नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शनिवार को आपातकाल को भारत के लोकतंत्र का ‘काला अध्याय’ बताया। उन्होंने उस समय की घटनाओं को याद किया। दुबे ने अभिनेत्री और कार्यकर्ता स्नेहलता रेड्डी की गिरफ्तारी और जेल में उनके साथ हुए बर्ताव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आपातकाल ‘हजारों लोगों के उत्पीड़न की कहानी’ था।
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने कहा कि 2 मई 1976 को इंदिरा गांधी की सरकार ने दक्षिण भारत की प्रसिद्ध अभिनेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहलता रेड्डी को गिरफ्तार किया था। उनका कसूर सिर्फ इतना था कि वह नेता जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़ी हुई थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके परिवार के सदस्यों के साथ भी अत्याचार किया। यहां तक कि उनके 84 साल के पिता को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
दुबे के अनुसार, जेल में स्नेहलता रेड्डी को बहुत बुरी हालत में रखा गया और लंबे समय तक बिना मुकदमे के उन्हें कैद में रहना पड़ा। बाद में जनवरी 1977 में उन्हें गंभीर हालत में पैरोल पर रिहा किया गया और कुछ दिनों बाद उनकी मृत्यु हो गई।
स्नेहलता रेड्डी कौन थीं?
स्नेहलता रेड्डी का जन्म 1932 में हुआ था। वह कन्नड़ और तेलुगु सिनेमा और थिएटर की जानी-मानी कलाकार थीं। उन्होंने ‘संस्कार’ फिल्म में भी काम किया था, जिसे 1970 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। उन्हें आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कानून (मीसा) के तहत गिरफ्तार किया गया था और बड़ौदा डायनामाइट मामले से जुड़ा बताया गया था। हालांकि, उनका नाम अंतिम आरोपपत्र में नहीं था। वह लगभग आठ महीने तक बिना मुकदमे के जेल में रहीं और बाद में गंभीर हालत में रिहा की गईं। जिसके कुछ दिनों बाद उनका निधन हो गया।

