पुणे । वर्ष 2024 के बहुचर्चित पुणे पोर्श हिट एंड रन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने खून के सैंपल से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार तीन आरोपियों को नियमित जमानत दे दी है। जमानत पाने वालों में आदित्य अविनाश सूद, आशीष सतीश मित्तल और अमर संतोष गायकवाड़ शामिल हैं। इन पर आरोप था कि इन्होंने हादसे में शामिल नाबालिग आरोपी को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ की।
मामले के अनुसार, 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक पोर्श कार ने दो लोगों को टक्कर मार दी थी, जिससे दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि हादसे के समय कार एक 17 वर्षीय नाबालिग चला रहा था, जो कथित तौर पर शराब के नशे में था।
पुलिस जांच में आरोप लगाया गया कि नाबालिग आरोपी के पिता और अन्य सहयोगियों ने मेडिकल जांच को प्रभावित करने की साजिश रची। आरोप है कि शराब सेवन की पुष्टि से बचने के लिए नाबालिग की जगह अन्य लोगों के खून के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। इसी आधार पर आदित्य अविनाश सूद समेत कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी पिछले करीब 18 महीनों से जेल में बंद हैं। लंबी हिरासत और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों को नियमित जमानत देने का निर्णय लिया।
सुनवाई के दौरान आरोपी आदित्य अविनाश सूद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत पाटिल और अधिवक्ता आबिद मुलानी ने पक्ष रखा। दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने जमानत का आदेश पारित किया।
गौरतलब है कि इस मामले में नाबालिग आरोपी को पहले ही जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड से जमानत मिल चुकी है। जमानत की शर्तों में उसे सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा गया था। इस फैसले को लेकर देशभर में तीखी आलोचना हुई थी, जिसके बाद जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने आदेश में संशोधन किया था।
पुणे पोर्श हिंड एंड रन केस में तीन आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ का था आरोप

