नई दिल्ली। संसद में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद देश की सियासत तेज हो गई है। सत्ता पक्ष इसके लिए विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है तो विपक्ष इसे सरकार की साजिश करार दे रहा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने आज शनिवार को केंद्र सरकार के रवैये पर हमला करते हुए कहा कि कल जो कुछ भी हुआ वो लोकतंत्र और संविधान की जीत है। उन्होंने कहा कि ये महिला बिल की नहीं बल्कि परिसीमन की बात थी, इनको अपनी मनमानी करने की पूरी आजादी मिल जाती। महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश ना करें।
शनिवार (18 अप्रैल) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए सरकार ने साजिश की। उन्होंने कहा कि सरकार खुद भी जानती थी कि ये बिल पास नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एक साजिश के तहत बिल लाया गया। सरकार कोशिश थी अगर बिल पास हो गया था तो देश की महिलाओं के लिए मसीहा बन जाएगी और अगर पास नहीं हुआ तो घर-घर जाकर विपक्ष को महिलाओं का विरोधी करार देंगे।
‘सत्ता के लिए हिलाओं का इस्तेमाल किया’
उन्होंने कहा किगृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने-अपने भाषणों में कहा कि अगर विपक्ष इस मुद्दे पर सहमत नहीं होगा तो न कभी चुनाव जीत पाएगा, न ही सत्ता में आ पाएगा। उन्होंने कहा कि इन बातों से ही साफ़ हो गया कि सरकार की मंशा क्या थी। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि सरकार द्वारा जो साजिश रची गई, उसका उद्देश्य सत्ता हासिल करना है। इसके लिए सरकार ने सत्ता के लिए महिलाओं का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस ने बीजेपी की मंशा पर उठाए सवाल
सांसद ने कहा कि सरकार चाहती थी कि महिला आरक्षण के नाम पर विपक्ष यह बिल पारित करवा दे, ताकि उन्हें मनमाने तरीके से परिसीमन की आजादी मिल जाए, जिससे मोदी सरकार को जातिगत जनगणना का सहारा न लेना पड़े। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का मानना था कि अगर बिल पारित होगा तो उनकी जीत होगी और बिल पारित नहीं हुआ तो विपक्ष को महिला विरोधी बता देंगे। उन्होंने कहा कि BJP ऐसा कर खुद को महिलाओं का मसीहा साबित करना चाहती थी।
‘महिलाओं का मसीहा’ बनना चाहती है बीजेपी’
इसके आगे उन्होंने कहा कि BJP का महिलाओं के संदर्भ में एक इतिहास है। ये इतिहास बहुत स्पष्ट है। सिर्फ सदन में विपरीत कहने से इस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं ने उन्नाव को देखा, हाथरस को देखा, महिला खिलाड़ियों को देखा, मणिपुर की महिलाओं को देखा। मोदी सरकार ने कभी उनकी सुध नहीं ली और आज संसद में ‘महिलाओं का मसीहा’ बनना चाहती है।
‘यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी’
सांसद ने कहा कि ये महिला आरक्षण बिल की बात नहीं थी, यह बात परिसीमन से जुड़ी हुई थी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को परिसीमन इस आधार पर करना था, जिसमें उसे जातिगत जनगणना के आंकड़ों को देखने की जरूरत नहीं होती और मनमानी करने की पूरी आजादी होती। उन्होंने कहा कि ऐसे में मुमकिन ही नहीं था कि विपक्ष मोदी सरकार का साथ दे। उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देख लिया है कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो कैसे मोदी सरकार को हराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए ये काला दिन इसलिए क्योंकि इनको धक्का लगा। विपक्ष ने सरकार की साजिश को नाकाम किया।
टीवी 9 भारतवर्ष के सवाल पर क्या कहा
वहीं टीवी 9 भारतवर्ष के सवाल पर प्रियंका गांधी ने कहा कि जैसे इंदिरा जी और अटल जी ने परिसीमन किया, लेकिन सीटों की संख्या फ्रीज रखी। वो देश की एकता अखंडता के लिए जरूरी था। उन्होंने कहा कि इसलिए सरकार सीटें बढ़ाकर छोटे और दक्षिण के राज्यों की ताकत लोकतंत्र में कमज़ोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि हम इसके खिलाफ हैं, हम चाहते हैं जो सीटों की संख्या है वही रहे। उन्होंने कहा कि सरकार के सीट बढाने का प्रस्ताव ठीक नहीं, बेहतर है जितनी सीटें हैं उतनी ही रहें और उसमें महिलाओं को 33 आरक्षण मिले। उन्होंने आगे कहा कि महिलाएं बेवकूफ नहीं है इनकी मीडिया पीआर बाजी नही। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओ को गुमराह करने की कोशिश ना करें। उन्होंने कहा कि ये समझ नही पा रहे हैं कि देश बदल गया है, जनता बदल गई है। उन्होंने कहा कि देश 12 साल पहले वाली स्थिति में नहीं है, बीजेपी देश भर में अपना अभियान खुलकर करे।

