‘इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ता है पाकिस्तान’, यूएन में भारत ने पाक को दिखाया आईना

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरिश ने एक बार फिर धार्मिक पहचान को राजनीतिक हथियार बनाए जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई है। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान पर भी तीखा हमला बोला।
हरिश ने कहा कि आज दुनिया को यह समझने की जरूरत है कि धार्मिक पहचान का राजनीतिक इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसमें राज्य तथा गैर-राज्य दोनों तरह के तत्व शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पश्चिमी पड़ोसी पाकिस्तान ने अपने आसपास के क्षेत्रों में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ हो रहे क्रूर दमन को क्या कहा जाएगा। इसके अलावा अफगान नागरिकों को बड़ी संख्या में जबरन वापस भेजे जाने और रमजान के पवित्र महीने के दौरान हवाई हमलों की घटनाओं को किस श्रेणी में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि जो देश खुद इन मुद्दों में घिरा हुआ है, वही दूसरों पर आरोप लगाने में सबसे आगे रहता है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार संगठन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ह्रढ्ढष्ट) का इस्तेमाल भारत के खिलाफ एक राजनीतिक मंच के रूप में करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ह्रढ्ढष्ट की ओर से भारत पर कई बार झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं।
हरिश ने कहा कि भारत में मुसलमान, जिनमें जम्मू-कश्मीर के मुसलमान भी शामिल हैं, लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपने प्रतिनिधि चुनते हैं और अपनी बात खुलकर रखते हैं। उन्होंने कहा, भारत में इस्लामोफोबिया जैसी कोई स्थिति नहीं है। यहां हर समुदाय, मुस्लिम समुदाय सहित, शांति और सौहार्द के साथ रहता है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हुए कहा कि संगठन को अपना समय और संसाधन ऐसे समावेशी समाज के निर्माण में लगाना चाहिए जहां हर व्यक्ति को समानता, सम्मान और कानून के शासन का अधिकार मिले, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

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