अमेरिका में नए टैरिफ पर घमासान, 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया

वॉशिंगटन, एजेंसी। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नई टैरिफ नीति कानूनी विवादों में घिर गई है। सोमवार को 25 राज्यों ने प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया कि नए टैरिफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जा चुके आयात करों की भरपाई करने का एक नया तरीका हैं।

पिछले महीने अमेरिका ने 59 देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले कई उत्पादों पर 10 प्रतिशत या उससे अधिक का टैरिफ लगाया था। प्रशासन का कहना है कि इन देशों ने जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।

यह कदम उस समय उठाया गया, जब ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अस्थायी टैरिफ की समय-सीमा समाप्त होने वाली थी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत व्यापक आयात शुल्क लगाना कानून के दायरे में नहीं आता। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन को कई आयातकों से वसूली गई राशि लौटानी पड़ी थी।

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बावजूद प्रशासन एक बार फिर नए टैरिफ के जरिए परिवारों और कारोबारियों पर गैर-कानूनी तरीके से अतिरिक्त टैक्स का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।

ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि ऊंचे आयात शुल्क से अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। इसी नीति के तहत उन्होंने अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही कम टैरिफ और मुक्त व्यापार की नीति से अलग रुख अपनाया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन अब ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत अधिक स्थायी टैरिफ लागू कर रहा है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ आयात शुल्क और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार देता है, जिन पर अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का आरोप हो।

ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में भी चीन पर भारी टैरिफ लगाने के लिए इसी धारा का इस्तेमाल कर चुके हैं, जिसे अदालतों में कानूनी चुनौती के बावजूद बरकरार रखा गया था।

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि प्रशासन अमेरिकी व्यापार और कामगारों के हितों की रक्षा के लिए अपने कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। उनका कहना है कि जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाने वाले देशों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, क्योंकि इससे अमेरिकी उद्योग और श्रमिकों को नुकसान पहुंचता है।

प्रशासन का दावा है कि सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ पहले भी प्रभावी और कानूनी रूप से मजबूत साबित हुए हैं और इस बार भी उनका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों की रक्षा करना है।

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