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12 Aug 2026, Wed

2029 तक बंद रह सकता है होर्मुज! मुज्तबा की रणनीति में कैसे उलझे ट्रंप?

वॉशिंगटन, एजेंसी। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान की रणनीति ने अमेरिका के सामने ऐसी चुनौती खड़ी कर दी है, जिसका सीधा असर दुनिया की तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। रिपोर्टों में आशंका जताई जा रही है कि अगर दोनों देशों के बीच गतिरोध खत्म नहीं हुआ, तो होर्मुज में सामान्य जहाजरानी लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है।
ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को लेकर सामने आ रहे दावों के मुताबिक, तेहरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ तत्काल समझौते के बजाय लंबा इंतजार करने की रणनीति अपना सकता है। ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल 2029 में समाप्त होगा। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान तब तक दबाव बनाए रखने की रणनीति पर चल सकता है।

होर्मुज को लेकर ट्रंप और जमीनी हकीकत में कितना अंतर?

डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और वहां मौजूद समुद्री खतरों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है। हालांकि, शिपिंग ट्रैफिक के आंकड़े तस्वीर कुछ अलग बताते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध से पहले जहां होर्मुज से रोजाना करीब 130 से 140 जहाज गुजरते थे, वहीं हाल के पांच दिनों में यहां से सिर्फ 42 जहाजों के गुजरने की बात सामने आई है। इसमें तेल टैंकरों के साथ-साथ वाणिज्यिक और अन्य मालवाहक जहाज भी शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि जलडमरूमध्य में सामान्य समुद्री आवाजाही अभी भी गंभीर रूप से प्रभावित है।

ईरान के खिलाफ ट्रंप के सामने तीन विकल्प

मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने मोटे तौर पर तीन विकल्प दिखाई देते हैं।

पहला विकल्प सैन्य कार्रवाई: अमेरिका ईरान पर हमले बढ़ा सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना आसान नहीं होगा। ईरान जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बना सकता है, जिससे अमेरिका पर सैन्य दबाव और बढ़ सकता है।

दूसरा विकल्प आर्थिक दबाव: अमेरिका ईरान पर प्रतिबंध और आर्थिक दबाव और बढ़ा सकता है। हालांकि, ईरान लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अब तक इनसे उसकी सरकार को झुकाया नहीं जा सका है।

तीसरा विकल्प मौजूदा स्थिति बनाए रखना: अमेरिका फिलहाल स्थिति को इसी तरह जारी रख सकता है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान वैश्विक तेल आपूर्ति को हो सकता है। होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान बना रहा तो तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ सकता है।

ट्रंप के सामने क्यों मुश्किल है होर्मुज खोलना?

होर्मुज पर सैन्य नियंत्रण हासिल करना अमेरिका के लिए बेहद जटिल और महंगा अभियान साबित हो सकता है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की चिंताओं का हवाला देते हुए रिपोर्टों में कहा गया है कि ऐसा कोई भी ऑपरेशन लंबा, खर्चीला और जानलेवा हो सकता है।

इसके अलावा, ईरान अगर सीधे अमेरिकी ठिकानों के बजाय क्षेत्रीय सहयोगियों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाता है, तो संकट और गहरा सकता है। इससे सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर भी दबाव बढ़ेगा।

होर्मुज के विकल्प तैयार करने में जुटी दुनिया

होर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश वैकल्पिक तेल मार्गों पर भी जोर दे रहे हैं। सऊदी अरब और यूएई पहले से ऐसे मार्गों के विकास पर काम कर रहे हैं, जिनके जरिए तेल को होर्मुज से बाहर भेजा जा सके।

इसी कड़ी में इराक भी अपने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग विकसित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित मार्गों में इराक से तुर्किए और भूमध्यसागर तक तेल पहुंचाने की योजना शामिल है।

एक प्रस्तावित पाइपलाइन बसरा से शुरू होकर हदीथा, बैजी और फिशखाबूर होते हुए तुर्किए के सीहान बंदरगाह तक पहुंच सकती है। इसकी लंबाई करीब 1,200 से 1,300 किलोमीटर और संभावित क्षमता लगभग 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है।

हदीथा-बनियास पाइपलाइन भी विकल्प

इराक के पास दूसरा विकल्प हदीथा-बनियास पाइपलाइन को फिर से विकसित करना है। यह मार्ग इराक के हदीथा से सीरिया के भूमध्यसागरीय तट पर स्थित बनियास बंदरगाह तक जाने की योजना पर आधारित है।

इस पाइपलाइन की लंबाई करीब 850 से 900 किलोमीटर और संभावित क्षमता 15 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जा रही है। यदि ये परियोजनाएं पूरी होती हैं, तो इराक के तेल निर्यात की होर्मुज पर निर्भरता काफी कम हो सकती है।

क्या वैकल्पिक तेल मार्ग भी ईरान के निशाने पर होंगे?

यहीं से संकट और गंभीर हो सकता है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है, तो ईरान या उसके क्षेत्रीय सहयोगी वैकल्पिक तेल मार्गों और पाइपलाइनों को भी निशाना बना सकते हैं।

सऊदी अरब की तेल पाइपलाइनों पर हूती हमलों का खतरा और इराक के ऊर्जा ढांचे पर मिलिशिया गतिविधियां क्षेत्रीय तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में होर्मुज का विकल्प तैयार करना अपने आप में पर्याप्त नहीं होगा।

2029 तक खिंचा तनाव तो बढ़ेगा ऊर्जा संकट

मौजूदा घटनाक्रम से साफ है कि होर्मुज का मुद्दा सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच टकराव तक सीमित नहीं है। यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है।

अगर दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित रहती है, तो तेल की कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक महंगाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। ऐसे में 2029 तक जारी रहने वाला गतिरोध दुनिया के लिए गंभीर ऊर्जा संकट का कारण बन सकता है।

By Aryavartkranti Bureau

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