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8 Aug 2026, Sat

सोशल मीडिया पर सरकार का शिकंजा! आपत्तिजनक कंटेंट 3 घंटे के भीतर हटाना होगा अनिवार्य

नई दिल्ली। डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी नए निर्देशों के तहत सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को गैर-कानूनी, आपत्तिजनक या संवेदनशील सामग्री की शिकायत मिलने के बाद तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्रवाई के लिए प्लेटफॉर्म्स को अब महज 3 घंटे का समय दिया जाएगा। इससे पहले कुछ मामलों में शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई के लिए 24 से 36 घंटे तक की समयसीमा लागू थी। नई व्यवस्था का उद्देश्य आपत्तिजनक सामग्री को तेजी से हटाकर उसके बड़े पैमाने पर प्रसार को रोकना है।

सरकार ने क्यों बढ़ाई सख्ती?

सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया के दौर में कोई भी फर्जी वीडियो, डीपफेक या भ्रामक सामग्री कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। इससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता, सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।

खास तौर पर डीपफेक और AI-जनरेटेड कंटेंट के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार के मुताबिक, त्वरित कार्रवाई से ऐसी सामग्री के प्रसार को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

किन तरह के कंटेंट पर होगी सख्ती?

नए नियमों के तहत ऐसे कंटेंट पर विशेष कार्रवाई की जा सकती है, जिनमें शामिल हैं:

किसी व्यक्ति की छवि या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले फर्जी वीडियो या तस्वीरें।
बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री (CSAM)।
बिना सहमति के साझा की गई निजी या अश्लील सामग्री।
ऐसी भ्रामक या संवेदनशील सामग्री, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था या देश की संप्रभुता पर खतरा पैदा हो सकता है।
डीपफेक और अन्य AI-जनरेटेड सामग्री, जो लोगों को गुमराह करने या नुकसान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हो।
नियमों का पालन नहीं किया तो क्या होगा?

सरकार ने प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया है। निर्धारित समयसीमा में आवश्यक कार्रवाई नहीं करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण पर असर पड़ सकता है।

सेफ हार्बर के तहत मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा मिलती है। यह सुरक्षा समाप्त होने की स्थिति में प्लेटफॉर्म्स को संबंधित सामग्री को लेकर सीधे कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

इस नई व्यवस्था का मकसद सोशल मीडिया कंपनियों को अधिक जवाबदेह बनाना और डिजिटल स्पेस को यूजर्स के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

By Aryavartkranti Bureau

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