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6 Aug 2026, Thu

जन्म के पहले घंटे में जरूर कराएं स्तनपान, नवजात को बनाएं आयुष्मान

मुकेश कुमार शर्मा
मां का पहला पीला गाढ़ा दूध यानि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान नवजात के जीवन की नई शुरुआत का सबसे कारगर और प्रभावी तरीका है। यह जहाँ बच्चे को सम्पूर्ण पोषण प्रदान करता है वहीँ रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है। इसके अलावा मां और बच्चे में एक जुड़ाव और लगाव भी पैदा करता है। इतने सारे गुणों से भरपूर स्तनपान को लेकर आज भी कई भ्रांतियां और मिथक भी मौजूद हैं, जिनको दूर करने के लिए हर साल एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इस दौरान अस्पतालों और समुदाय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर शीघ्र स्तनपान (जन्म के पहले घंटे) और छह माह तक सिर्फ स्तनपान को बढ़ावा देने का कार्य किया जाता है। इस साल विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “जीवन की सतत शुरुआत के लिए स्तनपान-कारगर उपायों को सुदृढ़ बनाना” तय की गयी है। इसका उद्देश्य मां (खासकर कामकाजी महिलाओं) और बच्चे को एक ऐसा बेहतर माहौल प्रदान करना है, जिससे वह स्तनपान में किसी तरह की हिचक या संकोच न महसूस कर सकें।
मां का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलेस्ट्रम) को नवजात का पहला टीका भी माना जाता है, क्योंकि वह बच्चे को डायरिया, निमोनिया और कुपोषण समेत कई संक्रामक बीमारियों से महफूज बनाने के साथ ही शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक साबित होता है। स्तनपान एक तरह से शिशु का मौलिक अधिकार भी है, इसलिए परिवार और कार्यस्थल की जिम्मेदारी बनती है कि वह महिला को एक ऐसा सुरक्षित माहौल प्रदान करें जहाँ पर वह बच्चे को आसानी से स्तनपान करा सके। इसके साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि शिशु को छह माह तक सिर्फ और सिर्फ स्तनपान कराना है क्योंकि बाहरी कोई भी चीज देने से उसके संक्रमण की चपेट में आने की पूरी संभावना रहती है। अमृत समान माँ के अनमोल दूध में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, स्वस्थ वसा, विटामिन, खनिज और पानी का सही संतुलन होता है। जीवन के पहले छह माह के दौरान शिशु के विकास के लिए इन्हीं चीजों की सबसे अधिक जरूरत भी होती है। इसीलिए छह माह तक माँ अगर बच्चे को भरपूर स्तनपान कराती है तो ऊपर से पानी पिलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। बच्चे की खुशहाली और दूध का बहाव अधिक रखने के लिए जरूरी है कि माँ प्रसन्नचित रहें और तनाव व चिंता से दूर रहें।
बीमारी की स्थिति में भी माँ बच्चे को पूरी सावधानी के साथ स्तनपान जरूर कराएं क्योंकि यह बच्चे को बीमारी से सुरक्षित बनाता है। स्तनपान से जुड़े कई मिथक भी हैं, जैसे-स्तनपान में कठिनाई या दूध का पूरी तरह से न बनना। जबकि ऐसा कतई नहीं है, यदि बच्चे को सही जुड़ाव और सही तरीके से स्तनपान कराया जाए तो यह समस्या नहीं आ सकती। ऐसा महसूस हो तो जरूर स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र से सम्पर्क कर समस्या का समाधान पाया जा सकता है। इसके अलावा स्तन में दूध पर्याप्त मात्रा में बने इसके लिए जरूरी है कि माताएं अधिक से अधिक तरल पदार्थों और पोषक तत्वों को अपने भोजन में शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर संतुलित आहार को अपनाएं ताकि स्वस्थ रहें और दूध भी भरपूर मात्रा में बने।
केवल स्तनपान कर रहा शिशु 24 घंटे में छह से आठ बार पेशाब कर रहा है तो यह समझना चाहिए कि उसे भरपूर खुराक मिल रही है। इसके साथ ही स्तनपान के बाद बच्चा कम से कम दो घंटे की नींद ले रहा है और बच्चे का वजन हर माह 500 ग्राम बढ़ रहा है तो किसी तरह की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि यह प्रमाण है कि शिशु को भरपूर मात्रा में माँ का दूध मिल रहा है। नवजात को शीघ्र और नियमित स्तनपान कराने से जन्म के पश्चात बच्चेदानी के जल्दी सिकुड़ने, अधिक रक्तस्राव और एनीमिया से बचाव होता है। इसे एक कारगर गर्भनिरोधक के रूप में भी माना जाता है। मोटापा कम करने और शरीर को सुडौल बनाने में भी यह सहायक होता है। शिशु को स्तनपान कराने से स्तन और अंडाशय के कैंसर से भी बचाव होता है। कृत्रिम आहार या बोतल के दूध में पोषक तत्वों की मात्रा न के बराबर होती है। इसलिए यह बच्चे के पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इससे कुपोषण की जद में आने के साथ ही संक्रमण का जोखिम भी बना रहता है। बौद्धिक विकास को भी यह प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट भी बताती हैं कि छह माह तक लगातार शिशु को केवल स्तनपान कराने से 11 फीसदी दस्त रोग और 15 प्रतिशत निमोनिया के मामले को कम किया जा सकता है।
(लेखक पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं)

By Aryavartkranti Bureau

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