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6 Aug 2026, Thu

नेशनल हाईवे में खराब निर्माण पर सरकार सख्त, बिहार-यूपी और महाराष्ट्र से ज्यादा केरल में हुई कार्रवाई

नई दिल्ली, एजेंसी। नेशनल हाईवे परियोजनाओं में निर्माण कार्य में देरी, गुणवत्ता संबंधी खामियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई को लेकर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने केंद्र सरकार से कई सवाल पूछे। उन्होंने जानना चाहा कि पिछले पांच वर्षों में खराब निर्माण के लिए कितने कॉन्ट्रैक्टर, कंसल्टेंट और कंसेशनरी पर जुर्माना लगाया गया, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया या काम से हटाया गया। साथ ही उन्होंने गुणवत्ता नियंत्रण, जवाबदेही और थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट की व्यवस्था पर भी जानकारी मांगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जवाब देते हुए कहा कि सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) निर्माण संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेते हैं। खराब डिजाइन, कमजोर निगरानी, घटिया निर्माण सामग्री और अत्यधिक सब-कॉन्ट्रैक्टिंग जैसी वजहों से सड़कें समय से पहले खराब होने के मामले सामने आते हैं। ऐसे मामलों की जांच कर दोषी एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है और ठेकेदारों को अपने खर्च पर मरम्मत करानी पड़ती है।

गडकरी ने बताया कि सभी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट अनिवार्य नहीं है। आवश्यकता के अनुसार परियोजनाओं में स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त किए जाते हैं, जबकि नियमित निगरानी अथॉरिटी इंजीनियर, इंडिपेंडेंट इंजीनियर और संबंधित अधिकारी करते हैं।

सरकार के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कई परियोजनाओं में ठेकेदारों, कंसल्टेंट और कंसेशनरी के खिलाफ ठेका रद्द करने, जुर्माना लगाने, डिबार करने और ब्लैकलिस्ट करने जैसी कार्रवाई की गई है। खराब निर्माण के मामलों में ठेकेदारों से लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक का जुर्माना वसूला गया, जबकि मरम्मत का पूरा खर्च भी संबंधित ठेकेदारों ने ही उठाया।

राज्यों में हुई प्रमुख कार्रवाई

केरल (2024-25): सबसे अधिक 8 परियोजनाओं में कार्रवाई हुई। एक परियोजना में ठेकेदार ने अपने खर्च पर मरम्मत कराई, सात परियोजनाओं में ठेकेदारों और AE/IE के प्रमुख अधिकारियों को निलंबित किया गया, जबकि दो परियोजनाओं में संबंधित एजेंसियों को डिबार किया गया।
महाराष्ट्र (2024 और 2026): छह परियोजनाओं में कार्रवाई हुई। 2024 में ठेकेदारों पर 3.94 करोड़ रुपये और AE पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। दो परियोजनाओं में प्रमुख कर्मचारियों को निलंबित किया गया। 2026 में ठेकेदार पर 75 लाख रुपये और AE पर 12.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया।
बिहार (2022-24): पांच परियोजनाओं में कार्रवाई हुई। 2023 में एक ठेकेदार पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। कई मामलों में ठेकेदारों और AE/IE के प्रमुख अधिकारियों को निलंबित किया गया।
उत्तर प्रदेश (2026): तीन परियोजनाओं में कार्रवाई हुई, जिनमें एक परियोजना से ठेकेदार को हटा दिया गया।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, खराब निर्माण के मामलों में केरल में सबसे अधिक कार्रवाई दर्ज की गई, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में भी कई परियोजनाओं पर सख्त कदम उठाए गए।

By Aryavartkranti Bureau

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